Pratidin Ek Kavita

परचम।  कुमार अम्बुज 

वहाँ एक फूल खिला हुआ है अकेला 
कोई उसे छू भी नहीं रहा है 
किसी सुबह शाम में वह झर जाएगा 
लेकिन देखो, वह खिला हुआ है

बारिश, धूल और यातनाओं को और ऋतुओं को  जज़्ब करते हुए 
एक पत्थर भी है वहाँ किसी की प्रतीक्षा में 
आसपास की हर चीज़ इशारा करती है 
तालाब किनारे अँधेरी झाड़ियों में चमकते हैं जुगनू 
दुर्दिनों के किनारे शब्द

मुझे प्यास लग आयी है और यह सपना नहीं है 
जैसे पेड़ की यह छाँह मंज़िल नहीं 
यह समाज जो आख़िर एक दिन आज़ाद होगा 
उसकी संभावना मरते हए आदमी की आँखों में है 
और असफलता मृत्यु नहीं है 

यह जीवन है, धोखेबाज़ पर भी मुझे विश्वास करना होगा 
निराशाएँ अपनी गतिशीलता में आशाएँ हैं

'मैं रोज़ परास्त होता हूँ'-
इस बात के कम से कम बीस अर्थ हैं
यों भी एक-दो अर्थ देकर 
टिप्पणीकार काफ़ी कुछ नक़सान पहुँचा चुके हैं 
गणनाएँ असंख्य को संख्या में न्यून करती चली जाती हैं

सतह पर जो चमकता है वह परावर्तन है
उसके नीचे कितना कुछ है अपार 
शांत, चपल और भविष्य से लबालब भरा हुआ।


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

परचम। कुमार अम्बुज

वहाँ एक फूल खिला हुआ है अकेला
कोई उसे छू भी नहीं रहा है
किसी सुबह शाम में वह झर जाएगा
लेकिन देखो, वह खिला हुआ है

बारिश, धूल और यातनाओं को और ऋतुओं को जज़्ब करते हुए
एक पत्थर भी है वहाँ किसी की प्रतीक्षा में
आसपास की हर चीज़ इशारा करती है
तालाब किनारे अँधेरी झाड़ियों में चमकते हैं जुगनू
दुर्दिनों के किनारे शब्द

मुझे प्यास लग आयी है और यह सपना नहीं है
जैसे पेड़ की यह छाँह मंज़िल नहीं
यह समाज जो आख़िर एक दिन आज़ाद होगा
उसकी संभावना मरते हए आदमी की आँखों में है
और असफलता मृत्यु नहीं है

यह जीवन है, धोखेबाज़ पर भी मुझे विश्वास करना होगा
निराशाएँ अपनी गतिशीलता में आशाएँ हैं

'मैं रोज़ परास्त होता हूँ'-
इस बात के कम से कम बीस अर्थ हैं
यों भी एक-दो अर्थ देकर
टिप्पणीकार काफ़ी कुछ नक़सान पहुँचा चुके हैं
गणनाएँ असंख्य को संख्या में न्यून करती चली जाती हैं

सतह पर जो चमकता है वह परावर्तन है
उसके नीचे कितना कुछ है अपार
शांत, चपल और भविष्य से लबालब भरा हुआ।