Pratidin Ek Kavita

तुमसे मिलने पर | सुनील गंगोपाध्याय
अनुवाद : रोहित प्रसाद पथिक


तुमसे मिलने पर

मैं पूछता हूँ :
तुम मनुष्य से प्रेम नहीं करते हो,

पर देश से क्यों प्रेम करते हो?
देश तुम्हें क्या देगा?

देश क्या ईश्वर के जैसा है कुछ?
तुमसे मिलने पर

मैं पूछता हूँ :
बंदूक़ की गोली ख़रीदने के बाद

प्राण देने पर देश कहाँ पर होगा?
देश क्या जन्म-स्थान की मिट्टी है

या कि काँटेदार तार की सीमा?
बस से उतरकर

जिसकी तुमने हत्या की
क्या उसका देश नहीं?

तुमसे मिलने पर
मैं पूछता हूँ :

तुम किस तरह समझे कि मैं तुम्हारा शत्रु हूँ?
किसी प्रश्न का उत्तर न देने पर

क्या तुम मेरी तरफ़ रायफ़ल घुमाओगे?
इस तरह के भी

प्रेमहीन देशप्रेमी होते हैं!

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

तुमसे मिलने पर | सुनील गंगोपाध्याय
अनुवाद : रोहित प्रसाद पथिक

तुमसे मिलने पर

मैं पूछता हूँ :
तुम मनुष्य से प्रेम नहीं करते हो,

पर देश से क्यों प्रेम करते हो?
देश तुम्हें क्या देगा?

देश क्या ईश्वर के जैसा है कुछ?
तुमसे मिलने पर

मैं पूछता हूँ :
बंदूक़ की गोली ख़रीदने के बाद

प्राण देने पर देश कहाँ पर होगा?
देश क्या जन्म-स्थान की मिट्टी है

या कि काँटेदार तार की सीमा?
बस से उतरकर

जिसकी तुमने हत्या की
क्या उसका देश नहीं?

तुमसे मिलने पर
मैं पूछता हूँ :

तुम किस तरह समझे कि मैं तुम्हारा शत्रु हूँ?
किसी प्रश्न का उत्तर न देने पर

क्या तुम मेरी तरफ़ रायफ़ल घुमाओगे?
इस तरह के भी

प्रेमहीन देशप्रेमी होते हैं!