Pratidin Ek Kavita

न होगा कुछ तब। ऋतु कुमार ऋतु

हमें मालूम है
एक न एक दिन हम सब मिल जाएँगे

इसी मिट्टी में
एक न एक दिन

हमें मालूम है
होगी निष्प्राण यह सृष्टि

हमें मालूम है
एक न एक दिन

अपने यक़ीन पर आ जाएँगे
हम सब

और किसी सबूत की ज़रूरत नहीं होगी!

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

न होगा कुछ तब। ऋतु कुमार ऋतु

हमें मालूम है
एक न एक दिन हम सब मिल जाएँगे

इसी मिट्टी में
एक न एक दिन

हमें मालूम है
होगी निष्प्राण यह सृष्टि

हमें मालूम है
एक न एक दिन

अपने यक़ीन पर आ जाएँगे
हम सब

और किसी सबूत की ज़रूरत नहीं होगी!