Pratidin Ek Kavita

मृत्यु-गीत | लैंग्स्टन ह्यूज़

अनुवाद : धर्मवीर भारती

मातम के नक़्क़ारे बजाओ मेरे लिए,
मातम और मौत के नक़्क़ारे बजाओ मेरे लिए

और भीड़ से कह दो कि मिल कर के मरसिया गाए
ताकि उसकी आवाज़ में मेरी हिचकियाँ डूब जाएँ।

मौत के नक़्क़ारों के साथ
सिसकते हुए बेले की महीन और दुखी आवाज़—

लेकिन सूरज के संगीत से परिपूर्ण
शंख की एक हुँकार भरी आवाज़ भी हो,

जो मेरे साथ जाए,
उस अँधियारे मृत्युलोक में

जहाँ मैं जा रहा हूँ।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

मृत्यु-गीत | लैंग्स्टन ह्यूज़

अनुवाद : धर्मवीर भारती

मातम के नक़्क़ारे बजाओ मेरे लिए,
मातम और मौत के नक़्क़ारे बजाओ मेरे लिए

और भीड़ से कह दो कि मिल कर के मरसिया गाए
ताकि उसकी आवाज़ में मेरी हिचकियाँ डूब जाएँ।

मौत के नक़्क़ारों के साथ
सिसकते हुए बेले की महीन और दुखी आवाज़—

लेकिन सूरज के संगीत से परिपूर्ण
शंख की एक हुँकार भरी आवाज़ भी हो,

जो मेरे साथ जाए,
उस अँधियारे मृत्युलोक में

जहाँ मैं जा रहा हूँ।