Pratidin Ek Kavita

औरतें | शुभा

औरतें मिट्टी के खिलौने बनाती हैं

मिट्टी के चूल्हे
और झाँपी बनाती हैं

औरतें मिट्टी से घर लीपती हैं
मिट्टी के रंग के कपड़े पहनती हैं

और मिट्टी की तरह गहन होती हैं
औरतें इच्छाएँ पैदा करती हैं और

ज़मीन में गाड़ देती हैं
औरतों की इच्छाएँ

बहुत दिनों में फलती हैं

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

औरतें | शुभा

औरतें मिट्टी के खिलौने बनाती हैं

मिट्टी के चूल्हे
और झाँपी बनाती हैं

औरतें मिट्टी से घर लीपती हैं
मिट्टी के रंग के कपड़े पहनती हैं

और मिट्टी की तरह गहन होती हैं
औरतें इच्छाएँ पैदा करती हैं और

ज़मीन में गाड़ देती हैं
औरतों की इच्छाएँ

बहुत दिनों में फलती हैं