Pratidin Ek Kavita

घर की बातें । श्रद्धा उपाध्याय 

घर की बातें घर में नहीं रहनी चाहिए
घर की बातें सड़कों पर होनी चाहिए
रास्तों पर बेघर लोगों के साथ
सोना चाहिए घर की बातों को
घर की बातों को मोर्चा लेकर निकलना चाहिए शहर में 
पोस्टरों पर लिखी जानी चाहिए घर की बातें
घर की बातें पढ़ी जानी चाहिए अख़बारों पर और फिर उन बातों पर भेल पूरी रख कर खाना चाहिए
बना कर पतंग घर की बातों को आकाश में उड़ा देना चाहिए


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

घर की बातें । श्रद्धा उपाध्याय

घर की बातें घर में नहीं रहनी चाहिए
घर की बातें सड़कों पर होनी चाहिए
रास्तों पर बेघर लोगों के साथ
सोना चाहिए घर की बातों को
घर की बातों को मोर्चा लेकर निकलना चाहिए शहर में
पोस्टरों पर लिखी जानी चाहिए घर की बातें
घर की बातें पढ़ी जानी चाहिए अख़बारों पर और फिर उन बातों पर भेल पूरी रख कर खाना चाहिए
बना कर पतंग घर की बातों को आकाश में उड़ा देना चाहिए