Pratidin Ek Kavita

जिसके सम्मोहन में पागल धरती है आकाश भी है | अदम गोंडवी | आरती जैन

जिसके सम्मोहन में पागल धरती है, आकाश भी है
एक पहेली-सी दुनिया ये गल्प भी है, इतिहास भी है

चिंतन के सोपान पे चढ़कर चाँद-सितारे छू आये
लेकिन मन की गहराई में माटी की बू-बास भी है

मानवमन के द्वन्द्व को आख़िर किस साँचे में ढालोगे
‘महारास’ की पृष्ठभूमि में ओशो का संन्यास भी है

इन्द्रधनुष के पुल से गुज़रकर इस बस्ती तक आए हैं
जहाँ भूख की धूप सलोनी चंचल है, बिन्दास भी है

कंकरीट के इस जंगल में फूल खिले पर गंध नहीं
स्मृतियों की घाटी में यूँ कहने को मधुमास भी है

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

जिसके सम्मोहन में पागल धरती है आकाश भी है | अदम गोंडवी | आरती जैन

जिसके सम्मोहन में पागल धरती है, आकाश भी है
एक पहेली-सी दुनिया ये गल्प भी है, इतिहास भी है

चिंतन के सोपान पे चढ़कर चाँद-सितारे छू आये
लेकिन मन की गहराई में माटी की बू-बास भी है

मानवमन के द्वन्द्व को आख़िर किस साँचे में ढालोगे
‘महारास’ की पृष्ठभूमि में ओशो का संन्यास भी है

इन्द्रधनुष के पुल से गुज़रकर इस बस्ती तक आए हैं
जहाँ भूख की धूप सलोनी चंचल है, बिन्दास भी है

कंकरीट के इस जंगल में फूल खिले पर गंध नहीं
स्मृतियों की घाटी में यूँ कहने को मधुमास भी है