Pratidin Ek Kavita

पुरानी बातें | श्रद्धा उपाध्याय 

पहले सिर्फ़ पुरानी बातें पुरानी लगती थीं 
अब नई बातें भी पुरानी हो गई हैं 
मैंने सिरके में डाल दिए हैं कॉलेज के कई दिन
 बचपन की यादें लगता था सड़ जाएँगी 
फिर किताबों के बीच रखी रखी सूख गईं 
कितनी तरह की प्रेम कहानियाँ 
उन पर नमक घिस कर धूप दिखा दी है
 ज़रुरत होगी तो तल कर परोस दी जाएँगी
और इतना कुछ फ़िसल हुआ हाथों से
 क्योंकि नहीं आता था उन्हें कोई हुनर


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

पुरानी बातें | श्रद्धा उपाध्याय

पहले सिर्फ़ पुरानी बातें पुरानी लगती थीं
अब नई बातें भी पुरानी हो गई हैं
मैंने सिरके में डाल दिए हैं कॉलेज के कई दिन
बचपन की यादें लगता था सड़ जाएँगी
फिर किताबों के बीच रखी रखी सूख गईं
कितनी तरह की प्रेम कहानियाँ
उन पर नमक घिस कर धूप दिखा दी है
ज़रुरत होगी तो तल कर परोस दी जाएँगी
और इतना कुछ फ़िसल हुआ हाथों से
क्योंकि नहीं आता था उन्हें कोई हुनर