Pratidin Ek Kavita

लड़ना।  पवन करण

मुझे उन सबकी ख़ूब याद आती है
जिन्होंने मुझसे कई बार कहा
कि मुझे लड़ना चाहिए

मैं उन सबको कभी भूल नहीं पाता
जो मुझसे हमेशा कहते रहे कि मुझे
लड़ने से डरना नहीं चाहिए

मैं उनसे माफ़ी माँगना चाहता हूँ
जिन्होंने मुझसे कहा कि मैं ही
नहीं लड़ूँगा तो फिर कौन लड़ेगा

मैंने उनकी मानी होती
तो मैं भी लड़कर हारा होता

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

लड़ना। पवन करण

मुझे उन सबकी ख़ूब याद आती है
जिन्होंने मुझसे कई बार कहा
कि मुझे लड़ना चाहिए

मैं उन सबको कभी भूल नहीं पाता
जो मुझसे हमेशा कहते रहे कि मुझे
लड़ने से डरना नहीं चाहिए

मैं उनसे माफ़ी माँगना चाहता हूँ
जिन्होंने मुझसे कहा कि मैं ही
नहीं लड़ूँगा तो फिर कौन लड़ेगा

मैंने उनकी मानी होती
तो मैं भी लड़कर हारा होता