Pratidin Ek Kavita

शहादत | सुनील झा

फूल, रास्ते
भीड़
नज़ारे सारे
तुम्हारे लिए
और, तुम हो कि चुप हो...
न सलाम
न दुआ
ऐसे भी कोई घर आता है भला!

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

शहादत | सुनील झा

फूल, रास्ते
भीड़
नज़ारे सारे
तुम्हारे लिए
और, तुम हो कि चुप हो...
न सलाम
न दुआ
ऐसे भी कोई घर आता है भला!