कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
विष्णु नागर । सबसे अच्छी कविता
सबसे अच्छी कविता
इतनी विनम्र होगी कि अविश्वसनीय लगेगी
इतनी प्राकृतिक होगी कि हिन्दी लगेगी
इतने दुखों में काम आएगी
कि लिखी हुई नहीं लगेगी
सबसे अच्छी कविता
सबसे बुरे दिनों में याद आएगी
उसे जो कंठ गाएगा मीठा लगेगा
सबसे अच्छी कविता
विकल कर देगी मुक्ति के लिए
सबसे अच्छी कविता
सबसे अच्छी बंदूक़ का सबसे बुरा झगड़ा साबित होगी
सबसे अच्छी कविता
सबसे बुरे दिनों में पहचानी जाएगी
देखते -देखते आग में बदल जाएगी