Pratidin Ek Kavita

आत्मालोचन | त्रिलोचन

शब्द,

मालूम है,
व्यर्थ नहीं जाते हैं

पहले मैं सोचता था
उत्तर यदि नहीं मिले

तो फिर क्या लिखा जाए
किंतु मेरे अंतरनिवासी ने मुझसे कहा—

लिखा कर
तेरा आत्मविश्लेषण क्या जाने कभी तुझे

एक साथ सत्य शिव सुंदर को दिखा जाए
अब मैं लिखा करता हूँ

अपने अंतर की अनुभूति बिना रंगे चुने
काग़ज़ पर बस उतार देता हूँ।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

आत्मालोचन | त्रिलोचन

शब्द,

मालूम है,
व्यर्थ नहीं जाते हैं

पहले मैं सोचता था
उत्तर यदि नहीं मिले

तो फिर क्या लिखा जाए
किंतु मेरे अंतरनिवासी ने मुझसे कहा—

लिखा कर
तेरा आत्मविश्लेषण क्या जाने कभी तुझे

एक साथ सत्य शिव सुंदर को दिखा जाए
अब मैं लिखा करता हूँ

अपने अंतर की अनुभूति बिना रंगे चुने
काग़ज़ पर बस उतार देता हूँ।