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कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
मतलब है | पराग पावन
मतलब है
सब कुछ पा लेने की लहुलुहान कोशिशों का
थकी हुई प्रतिभाओं और उपलब्धियों के लिए
तुम्हारी उदासीनता का गहरा मतलब है
जिस पृथ्वी पर एक दूब के उगने के हज़ार कारण हों
तुम्हें लगता है तुम्हारी इच्छाएँ यूँ ही मर गईं
एक रोज़मर्रा की दुर्घटना में