Pratidin Ek Kavita

इस समय | नीलेश रघुवंशी

एक कोने में बिल्ली अपने बच्चों को दूध पिला रही है।
छोटे-छोटे बच्चे और बिल्ली इतने सटे हुए हैं आपस में
मुश्किल है उन्हें गिननाq
एक औरत
पेड़ में रस्सी का झुला डाल, झुला रही है बच्चे को
साथ-साथ बच्चे के-औरत भी जा रही है धीरे-धीरे नींद में
इस समय एक पत्ता भी नहीं खड़कना चाहिए।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

इस समय | नीलेश रघुवंशी

एक कोने में बिल्ली अपने बच्चों को दूध पिला रही है।
छोटे-छोटे बच्चे और बिल्ली इतने सटे हुए हैं आपस में
मुश्किल है उन्हें गिननाq
एक औरत
पेड़ में रस्सी का झुला डाल, झुला रही है बच्चे को
साथ-साथ बच्चे के-औरत भी जा रही है धीरे-धीरे नींद में
इस समय एक पत्ता भी नहीं खड़कना चाहिए।