Pratidin Ek Kavita

विश्वास । आभा बोधिसत्व

मैंने अपने सिर पर
जो विश्वास की दीवार खड़ी की

वहाँ यही लिखा बार-बार
दुख बहुत छोटा है

ख़ुशी बहुत बड़ी
छोटे और बड़े के फ़र्क़

को जीना ही सागर
बन जाना है एक दिन

बूँद-बूँद
जुड़ कर विश्व


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

विश्वास । आभा बोधिसत्व

मैंने अपने सिर पर
जो विश्वास की दीवार खड़ी की

वहाँ यही लिखा बार-बार
दुख बहुत छोटा है

ख़ुशी बहुत बड़ी
छोटे और बड़े के फ़र्क़

को जीना ही सागर
बन जाना है एक दिन

बूँद-बूँद
जुड़ कर विश्व