Pratidin Ek Kavita

चार और पंक्तियाँ | प्रभाकर माचवे

जब दिल ने दिल को जान लिया

जब अपना-सा सब मान लिया
तब ग़ैर-बिराना कौन बचा

यदि बचा सिर्फ़ तो मौन बचा


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

चार और पंक्तियाँ | प्रभाकर माचवे

जब दिल ने दिल को जान लिया

जब अपना-सा सब मान लिया
तब ग़ैर-बिराना कौन बचा

यदि बचा सिर्फ़ तो मौन बचा