Pratidin Ek Kavita

भगवान के डाकिए | रामधारी सिंह दिनकर

पक्षी और बादल,
ये भगवान के डाकिए हैं,

जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।

हम तो समझ नहीं पाते हैं
मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ

पेड़, पौधे, पानी और पहाड़
बाँचते हैं।

हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती

दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए

पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप

दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

भगवान के डाकिए | रामधारी सिंह दिनकर

पक्षी और बादल,
ये भगवान के डाकिए हैं,

जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।

हम तो समझ नहीं पाते हैं
मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ

पेड़, पौधे, पानी और पहाड़
बाँचते हैं।

हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती

दूसरे देश को सुगंध भेजती है।
और वह सौरभ हवा में तैरते हुए

पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।
और एक देश का भाप

दूसरे देश में पानी
बनकर गिरता है।