Pratidin Ek Kavita

घरौंदा | एकता वर्मा 

धूल में नहाए शैतान बच्चे
खेल रहे हैं घरौंदा-घरौंदा।
जोड़ रहे हैं ईट के टुकडे, पत्थर, सीमेंट के गुटके
बना रहे हैं नन्हे-न्हे घर
हँस रहे हैं, तालियाँ पीट रहे हैं।
यह फ़िलिस्तीन का दुर्भाग्य है
कि उसके बच्चे अपने न्हे घरों को बनाने के लिए
चुन रहे हैं मलबा
पड़ोसियों के ज़मीदोज़ हुए मकानों से।
मैंने पूछा क्या कर रहे हो? 

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

घरौंदा | एकता वर्मा

धूल में नहाए शैतान बच्चे
खेल रहे हैं घरौंदा-घरौंदा।
जोड़ रहे हैं ईट के टुकडे, पत्थर, सीमेंट के गुटके
बना रहे हैं नन्हे-न्हे घर
हँस रहे हैं, तालियाँ पीट रहे हैं।
यह फ़िलिस्तीन का दुर्भाग्य है
कि उसके बच्चे अपने न्हे घरों को बनाने के लिए
चुन रहे हैं मलबा
पड़ोसियों के ज़मीदोज़ हुए मकानों से।
मैंने पूछा क्या कर रहे हो?