Pratidin Ek Kavita

दिल दुखता है | मोहसिन नक़वी

दिल दुखता है
आबाद घरों से दूर कहीं
जब बंजर बन में आग जले

दिल दुखता है
परदेस की बोझल राहों में
जब शाम ढले

दिल दुखता है
जब रात का क़ातिल सन्नाटा
पुर-हौल फ़ज़ा के वहम लिए
क़दमों की चाप के साथ चले

दिल दुखता है

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

दिल दुखता है | मोहसिन नक़वी

दिल दुखता है
आबाद घरों से दूर कहीं
जब बंजर बन में आग जले

दिल दुखता है
परदेस की बोझल राहों में
जब शाम ढले

दिल दुखता है
जब रात का क़ातिल सन्नाटा
पुर-हौल फ़ज़ा के वहम लिए
क़दमों की चाप के साथ चले

दिल दुखता है