Pratidin Ek Kavita

तुम्हारी आँखें।पराग पावन 

कितनी सुंदर हैं तुम्हारी आँखें 
मुझे कुछ और चाहिए 
जो कहा न गया हो आँखों के बारे में 
इतनी सुंदर आँखों से 
कितनी सुंदर दुनिया दिखती होगी 
और तुम्हारा काजल 
ओह जैसे पानी पर पानी बरसता है 
अपनी ही उछाल 
को उत्सव में बदलते हुए


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

तुम्हारी आँखें।पराग पावन

कितनी सुंदर हैं तुम्हारी आँखें
मुझे कुछ और चाहिए
जो कहा न गया हो आँखों के बारे में
इतनी सुंदर आँखों से
कितनी सुंदर दुनिया दिखती होगी
और तुम्हारा काजल
ओह जैसे पानी पर पानी बरसता है
अपनी ही उछाल
को उत्सव में बदलते हुए