Pratidin Ek Kavita

प्यार के बहुत चेहरे हैं / नवीन सागर

मैं उसे प्यार करता
यदि वह

ख़ुद वह होती
मैं अपना हृदय खोल देता

यदि वह
अपने भीतर खुल जाती

मैं उसे छूता
यदि वह देह होती

और मेरे हाथ होते मेरे भाव!
मैं उसे प्यार करता

यदि मैं पत्ता या हवा होता
या मैं ख़ुद को नहीं जानता

मैं जब डूब रहा था
वह उभर रही थी

जिस पल उसकी झलक दिखी
मैं कभी-कभी डूब रहा हूँ

वह अभी-अभी अपने भीतर उभर रही है
मैं उसे प्यार करता

यदि वह जानती
मैं ख़ामोशी की लय में अकेला उसे प्यार करता हूँ

प्यार के बहुत चेहरे हैं।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

प्यार के बहुत चेहरे हैं / नवीन सागर

मैं उसे प्यार करता
यदि वह

ख़ुद वह होती
मैं अपना हृदय खोल देता

यदि वह
अपने भीतर खुल जाती

मैं उसे छूता
यदि वह देह होती

और मेरे हाथ होते मेरे भाव!
मैं उसे प्यार करता

यदि मैं पत्ता या हवा होता
या मैं ख़ुद को नहीं जानता

मैं जब डूब रहा था
वह उभर रही थी

जिस पल उसकी झलक दिखी
मैं कभी-कभी डूब रहा हूँ

वह अभी-अभी अपने भीतर उभर रही है
मैं उसे प्यार करता

यदि वह जानती
मैं ख़ामोशी की लय में अकेला उसे प्यार करता हूँ

प्यार के बहुत चेहरे हैं।