Pratidin Ek Kavita

 जल | अशोक वाजपेयी

जल
खोजता है
जल में
हरियाली का उद्गम
कुछ नीली स्मृतियाँ 
और मटमैले चिद्म
जल
भागता है
जल की गली में
गाते हुए
लय का
विलय का उच्छल गान
जल देता है
जल को आवाज़,
जल सुनता है
जल की कथा,
जल उठाता है
अंजलि में
जल को,
जल करता है
जल में डूबकर
उबरने की प्रार्थना
जल में ही
थरथराती है
जल की कामना।



What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

जल | अशोक वाजपेयी

जल
खोजता है
जल में
हरियाली का उद्गम
कुछ नीली स्मृतियाँ
और मटमैले चिद्म
जल
भागता है
जल की गली में
गाते हुए
लय का
विलय का उच्छल गान
जल देता है
जल को आवाज़,
जल सुनता है
जल की कथा,
जल उठाता है
अंजलि में
जल को,
जल करता है
जल में डूबकर
उबरने की प्रार्थना
जल में ही
थरथराती है
जल की कामना।