Pratidin Ek Kavita

लगाव | रामदरश मिश्र 

उसने कविता में लिखा 'फूल'
तुमने उसे काटकर 'कीचड़' लिख दिया
उसने कविता में लिखा 'चिड़िया'
तुमने उसे काटकर 'गुरिल्ला' लिख दिया
और आपस में जूझने लगे
दरअसल तुम दोनों का
न फूल से कोई लगाव-अलगाव था
न चिड़िया से
तुम दोनों को
अपने-अपने अस्तित्व की चिन्ता सताती रही
और
तुम्हारी बहसों से बेख़बर
मस्ती से फूल खिलता रहा
चिड़िया गाती रही।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

लगाव | रामदरश मिश्र

उसने कविता में लिखा 'फूल'
तुमने उसे काटकर 'कीचड़' लिख दिया
उसने कविता में लिखा 'चिड़िया'
तुमने उसे काटकर 'गुरिल्ला' लिख दिया
और आपस में जूझने लगे
दरअसल तुम दोनों का
न फूल से कोई लगाव-अलगाव था
न चिड़िया से
तुम दोनों को
अपने-अपने अस्तित्व की चिन्ता सताती रही
और
तुम्हारी बहसों से बेख़बर
मस्ती से फूल खिलता रहा
चिड़िया गाती रही।