Pratidin Ek Kavita

निःशब्द भाषा में। नवीन सागर

कुछ न कुछ चाहता है बच्चा
बनाना

एक शब्द बनाना चाहता है बच्चा
नया

शब्द वह बना रहा होता है कि
उसके शब्द को हिला देती है भाषा

बच्चा निःशब्द
भाषा में चला जाता है

क्या उसे याद आएगा शब्द
स्मृति में हिला

जब वह रंगमंच पर जाएगा
बरसों बाद

भाषा में ढूँढ़ता अपना सच
कौंधेगा वह क्या एक बार!

बनाएगा कुछ या
चला जाएगा बना-बनाया

दीर्घ नेपथ्य में
बच्चा

कि जो चाहता है
बनाना

अभी कुछ न कुछ।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

निःशब्द भाषा में। नवीन सागर

कुछ न कुछ चाहता है बच्चा
बनाना

एक शब्द बनाना चाहता है बच्चा
नया

शब्द वह बना रहा होता है कि
उसके शब्द को हिला देती है भाषा

बच्चा निःशब्द
भाषा में चला जाता है

क्या उसे याद आएगा शब्द
स्मृति में हिला

जब वह रंगमंच पर जाएगा
बरसों बाद

भाषा में ढूँढ़ता अपना सच
कौंधेगा वह क्या एक बार!

बनाएगा कुछ या
चला जाएगा बना-बनाया

दीर्घ नेपथ्य में
बच्चा

कि जो चाहता है
बनाना

अभी कुछ न कुछ।