Pratidin Ek Kavita

मृत घोषित | अंकिता आनंद

उसके आख़िरी दिनों में

कभी टूथपेस्ट के ट्यूब को
दो टुकड़ों में काटा हो,

तो तुमने देखा होगा
कितना कुछ बचा रह जाता है

तब भी जब लगता है
सब ख़त्म हो गया।

ज़िंदगी का कितना बड़ा टुकड़ा
अक्सर फ़ेंक दिया जाता है

उसे मरा समझ।


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

मृत घोषित | अंकिता आनंद

उसके आख़िरी दिनों में

कभी टूथपेस्ट के ट्यूब को
दो टुकड़ों में काटा हो,

तो तुमने देखा होगा
कितना कुछ बचा रह जाता है

तब भी जब लगता है
सब ख़त्म हो गया।

ज़िंदगी का कितना बड़ा टुकड़ा
अक्सर फ़ेंक दिया जाता है

उसे मरा समझ।