Pratidin Ek Kavita

आकाँक्षा । नंदकिशोर आचार्य

एक अतीत रक्त की भाँति

प्रवाहित रहता है मुझमें
एक भविष्य ने साँसों की तरह

बाँध रखा है मुझे
और मैं - घड़ी को सुई -

भविष्य के अतीत में बदलने की
सूचना मात्र देता रह जाता हूँ।

क्या कभी नहीं हो सकता यह
एक पल के लिए ही सही

अतीत और भविष्य
मुझमें न मिल पाएँ

और तब मैं
मेरा सहारा लेने के लिए हाथ फैलाते

भयभीत ईश्वर
और मृत्यु को

शून्य में छटपटाते हुए
देख लूँ!

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

आकाँक्षा । नंदकिशोर आचार्य

एक अतीत रक्त की भाँति

प्रवाहित रहता है मुझमें
एक भविष्य ने साँसों की तरह

बाँध रखा है मुझे
और मैं - घड़ी को सुई -

भविष्य के अतीत में बदलने की
सूचना मात्र देता रह जाता हूँ।

क्या कभी नहीं हो सकता यह
एक पल के लिए ही सही

अतीत और भविष्य
मुझमें न मिल पाएँ

और तब मैं
मेरा सहारा लेने के लिए हाथ फैलाते

भयभीत ईश्वर
और मृत्यु को

शून्य में छटपटाते हुए
देख लूँ!