Pratidin Ek Kavita

बातें । नवीन सागर

बातें करते हुए
बातों के परे हम एक-एक के

होते जाते हैं
सोते जाते हैं जैसे सफ़र में बैठ-बैठ 

बातों में होते हैं हम जितना
उतने से कई गुना कहीं और

होते हैं
आख़िर को दिखते हैं ना होकर

होते हैं जहाँ वहाँ
दिखते ही नहीं हैं।


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

बातें । नवीन सागर

बातें करते हुए
बातों के परे हम एक-एक के

होते जाते हैं
सोते जाते हैं जैसे सफ़र में बैठ-बैठ

बातों में होते हैं हम जितना
उतने से कई गुना कहीं और

होते हैं
आख़िर को दिखते हैं ना होकर

होते हैं जहाँ वहाँ
दिखते ही नहीं हैं।