Pratidin Ek Kavita

बरसात मुबारक हो। मीना कुमारी नाज़

बरसात मुबारक हो
ये साथ मुबारक हो

हर दिन रहे सलोना
हर रात मुबारक हो

सँवलाई हुई शामों को
हर सुब्ह मुबारक हो

हिचकी हो या सिसकी हो
हर नग़्मा मुबारक हो

बरसात मुबारक हो
बरसात मुबारक हो


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

बरसात मुबारक हो। मीना कुमारी नाज़

बरसात मुबारक हो
ये साथ मुबारक हो

हर दिन रहे सलोना
हर रात मुबारक हो

सँवलाई हुई शामों को
हर सुब्ह मुबारक हो

हिचकी हो या सिसकी हो
हर नग़्मा मुबारक हो

बरसात मुबारक हो
बरसात मुबारक हो