Pratidin Ek Kavita

जन्मदिन ।  बेबी शॉ

 तुम्हें सोचते हुए
रोज़
एक नई दुनिया रचती हूँ

मिट्टी के चावल
धूल की सब्ज़ी
पत्ते की रोटी

खेल-घर जैसी...

एक ऐसी दुनिया
जिसे कोई नहीं जानता

जहाँ
प्रकाश-लोभ से
स्वयं को जलाती हूँ मैं...


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

जन्मदिन । बेबी शॉ

तुम्हें सोचते हुए
रोज़
एक नई दुनिया रचती हूँ

मिट्टी के चावल
धूल की सब्ज़ी
पत्ते की रोटी

खेल-घर जैसी...

एक ऐसी दुनिया
जिसे कोई नहीं जानता

जहाँ
प्रकाश-लोभ से
स्वयं को जलाती हूँ मैं...