Pratidin Ek Kavita

मन के पन्ने | नासिरा शर्मा 

जब तुम थककर सोते हो
तो तुम्हारे उजले तलवों को देख कर
 जाने क्यों ख़याल आता है उसपर लिख दूँ
 मन के इंद्रधनुष से एक प्रेम-पत्र
जिसमें लिखा हो अवाम का वह प्यार
जो हम उनसे करते हैं
जिस में हो उनके आहत मन की 
भूखी-प्यासी इच्छाओं के दस्तावेज़ 
और हमारी नाकाम कोशिशों के न थकने वाले हौसले
तुम जहाँ-जहाँ जाओ छप जाए धरती के सीने पर
यह शब्द
सपने, सपने और सपने हमारी उम्मीदों के
जिसपर चल सकें वह सब जो करते हैं प्रेम
जो लिख सकते हैं प्रेम पत्र दूसरों की व्यथाओं के
मेरे अक्षर और तुम्हारे क़दम रच सकते हैं 
आँसुओं की बारिश के बाद
एक नया इंद्रधनुष।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

मन के पन्ने | नासिरा शर्मा

जब तुम थककर सोते हो
तो तुम्हारे उजले तलवों को देख कर
जाने क्यों ख़याल आता है उसपर लिख दूँ
मन के इंद्रधनुष से एक प्रेम-पत्र
जिसमें लिखा हो अवाम का वह प्यार
जो हम उनसे करते हैं
जिस में हो उनके आहत मन की
भूखी-प्यासी इच्छाओं के दस्तावेज़
और हमारी नाकाम कोशिशों के न थकने वाले हौसले
तुम जहाँ-जहाँ जाओ छप जाए धरती के सीने पर
यह शब्द
सपने, सपने और सपने हमारी उम्मीदों के
जिसपर चल सकें वह सब जो करते हैं प्रेम
जो लिख सकते हैं प्रेम पत्र दूसरों की व्यथाओं के
मेरे अक्षर और तुम्हारे क़दम रच सकते हैं
आँसुओं की बारिश के बाद
एक नया इंद्रधनुष।