Pratidin Ek Kavita

ज़ाइद ज़िन्दगी । शारिक़ कैफ़ी

कहानी और होती कुछ हमारी
अगर हम वक़्त से सोने की आदत डाल लेते
मगर हम तो
न जाने क्या समझते थे सहर तक जागने को
जो हम ने जाग कर काटी हैं नींद आते हुए भी
वो ज़ाइद ज़िंदगी है
वो ज़ाइद ज़िंदगी है जिस ने सारे मसअले पैदा किए हैं
जिसे जीने में
ख़्वाबों के ये उल्झट्टे हुए हैं

ज़ाइद: अतिरिक्त

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

ज़ाइद ज़िन्दगी । शारिक़ कैफ़ी

कहानी और होती कुछ हमारी
अगर हम वक़्त से सोने की आदत डाल लेते
मगर हम तो
न जाने क्या समझते थे सहर तक जागने को
जो हम ने जाग कर काटी हैं नींद आते हुए भी
वो ज़ाइद ज़िंदगी है
वो ज़ाइद ज़िंदगी है जिस ने सारे मसअले पैदा किए हैं
जिसे जीने में
ख़्वाबों के ये उल्झट्टे हुए हैं

ज़ाइद: अतिरिक्त