Pratidin Ek Kavita

लिपि । हेमंत देवलेकर 

उन्होंने कहा
-" लिखो"
मैं मोबाइल पर टाइप करने लगा
यह देख वे भड़क उठे
-"हमने कहा, लिखो"

मेरी याददाश्त पर गहरी चोट पड़ी
और मोबाइल हाथ से गिर गया
वे पूर्वज थे
खिन्न होकर लौट गए
मैने गिरे हए मोबाइल को देखा :
मेरे हाथ से समूची लिपि फिसल गई थी

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

लिपि । हेमंत देवलेकर

उन्होंने कहा
-" लिखो"
मैं मोबाइल पर टाइप करने लगा
यह देख वे भड़क उठे
-"हमने कहा, लिखो"

मेरी याददाश्त पर गहरी चोट पड़ी
और मोबाइल हाथ से गिर गया
वे पूर्वज थे
खिन्न होकर लौट गए
मैने गिरे हए मोबाइल को देखा :
मेरे हाथ से समूची लिपि फिसल गई थी