Pratidin Ek Kavita

समर्पण | हेमंत देवलेकर

प्रेम सबको बहा ले जाता है
- नदी को भी
सिर्फ़ एक शब्द है नदी के जीवन में
-'समर्पण'
प्रेम से ज़्यादा श्रमसाध्य कोई काम नहीं
जब हमें नदी के पानी में
नदी का पसीना दिखाई देगा
समुद्र के खारेपन के बारे में
बदल जायेगी हमारी धारणा
हम उसे भी एक शीशी में भरकर ले आयेंगे।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

समर्पण | हेमंत देवलेकर

प्रेम सबको बहा ले जाता है
- नदी को भी
सिर्फ़ एक शब्द है नदी के जीवन में
-'समर्पण'
प्रेम से ज़्यादा श्रमसाध्य कोई काम नहीं
जब हमें नदी के पानी में
नदी का पसीना दिखाई देगा
समुद्र के खारेपन के बारे में
बदल जायेगी हमारी धारणा
हम उसे भी एक शीशी में भरकर ले आयेंगे।