Pratidin Ek Kavita

मुझे तुम मिले! | फणीश्वरनाथ रेणु

मुझे तुम मिले!

मृतक-प्राण में शक्ति-संचार कर;
निरंतर रहे पूज्य, चैतन्य भर!

पराधीनता-पाप-पंकिल धुले!
मुझे तुम मिले!

रहा सूर्य स्वातंत्र्य का हो उदय!
हुआ कर्मपथ पूर्ण आलोकमय!

युगों के घुले आज बंधन खुले!
मुझे तुम मिले!

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

मुझे तुम मिले! | फणीश्वरनाथ रेणु

मुझे तुम मिले!

मृतक-प्राण में शक्ति-संचार कर;
निरंतर रहे पूज्य, चैतन्य भर!

पराधीनता-पाप-पंकिल धुले!
मुझे तुम मिले!

रहा सूर्य स्वातंत्र्य का हो उदय!
हुआ कर्मपथ पूर्ण आलोकमय!

युगों के घुले आज बंधन खुले!
मुझे तुम मिले!