Pratidin Ek Kavita

धूप भी तो बारिश है | शहंशाह आलम 

धूप भी तो बारिश है

बारिश बहती है देह पर
धूप उतरती है नेह पर

मेरे संगीतज्ञ ने मुझे बताया
धूप है तो बारिश है
बारिश है तो धूप है

मैंने जिससे प्रेम किया
उसको बताया
तुम हो तो ताप और जल
दोनों है मेरे अंदर।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

धूप भी तो बारिश है | शहंशाह आलम

धूप भी तो बारिश है

बारिश बहती है देह पर
धूप उतरती है नेह पर

मेरे संगीतज्ञ ने मुझे बताया
धूप है तो बारिश है
बारिश है तो धूप है

मैंने जिससे प्रेम किया
उसको बताया
तुम हो तो ताप और जल
दोनों है मेरे अंदर।