Pratidin Ek Kavita

ये लोग | नरेश सक्सेना 

तूफान आया था
कुछ पेड़ों के पत्ते टूट गए हैं
कुछ की डालें
और कुछ तो जड़ से ही उखड़ गए हैं
इनमें से सिर्फ़
कुछ ही भाग्यशाली ऐसे बचे
जिनका यह तूफान कुछ भी नहीं बिगाड़ पाया
ये लोग ठूँठ थे।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

ये लोग | नरेश सक्सेना

तूफान आया था
कुछ पेड़ों के पत्ते टूट गए हैं
कुछ की डालें
और कुछ तो जड़ से ही उखड़ गए हैं
इनमें से सिर्फ़
कुछ ही भाग्यशाली ऐसे बचे
जिनका यह तूफान कुछ भी नहीं बिगाड़ पाया
ये लोग ठूँठ थे।