Pratidin Ek Kavita

आँखें देखकर । गोरख पांडेय

ये आँखें हैं तुम्हारी
तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुंदर

इस दुनिया को
जितनी जल्दी हो

बदल देना चाहिए।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

आँखें देखकर । गोरख पांडेय

ये आँखें हैं तुम्हारी
तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुंदर

इस दुनिया को
जितनी जल्दी हो

बदल देना चाहिए।