Pratidin Ek Kavita

राग भटियाली | कुँवर नारायण
 
एक राग है भटियाली
बाउल संगीत से जुड़ा हुआ

अंतिम स्वर को खुला छोड़ दिया जाता है
वायुमंडल में लहराता हुआ

जैसे संपूर्ण जीवन राग से युक्त हुई एक ध्वनि
अनंत में विलीन हो गई...

वह शेष स्वरों को बाँधता नहीं
इसलिए अंत में भी

उनसे बँधता नहीं,
अंतिम आह जैसा कुछ

एक अजीब तरह की मुक्ति का
एहसास देता है वह...


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

राग भटियाली | कुँवर नारायण

एक राग है भटियाली
बाउल संगीत से जुड़ा हुआ

अंतिम स्वर को खुला छोड़ दिया जाता है
वायुमंडल में लहराता हुआ

जैसे संपूर्ण जीवन राग से युक्त हुई एक ध्वनि
अनंत में विलीन हो गई...

वह शेष स्वरों को बाँधता नहीं
इसलिए अंत में भी

उनसे बँधता नहीं,
अंतिम आह जैसा कुछ

एक अजीब तरह की मुक्ति का
एहसास देता है वह...