Pratidin Ek Kavita

सड़क । धीरज 

तुम्हारा जाना,
मेरा ऐसे छूट जाना
जैसे हर साल छूट जाती है
गाँव की एक ख़राब सड़क
जिस पर लड़ा जा सके अगले साल का  चुनाव।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

सड़क । धीरज

तुम्हारा जाना,
मेरा ऐसे छूट जाना
जैसे हर साल छूट जाती है
गाँव की एक ख़राब सड़क
जिस पर लड़ा जा सके अगले साल का चुनाव।