Pratidin Ek Kavita

कविताएँ । धर्मेश

ख़त्म हो चुकी हैं कविताएँ

शब्दों ने कर ली है सामूहिक आत्महत्या
मजनूँ के क़त्ल हो जाने के डर से

लैला ने तिलांजलि दे दी है अपने प्रेम की
जंगल की हत्या पर आमादा शहर

चीर चुका है नदी का हृदय
सियारों को गाली देने वाले आदमी ने

नोच खाया है एक और आदमी को
मेरी आँखों में अब भी बचा है प्रेम

ये इस दुनिया की तबाही का सूत्र है

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

कविताएँ । धर्मेश

ख़त्म हो चुकी हैं कविताएँ

शब्दों ने कर ली है सामूहिक आत्महत्या
मजनूँ के क़त्ल हो जाने के डर से

लैला ने तिलांजलि दे दी है अपने प्रेम की
जंगल की हत्या पर आमादा शहर

चीर चुका है नदी का हृदय
सियारों को गाली देने वाले आदमी ने

नोच खाया है एक और आदमी को
मेरी आँखों में अब भी बचा है प्रेम

ये इस दुनिया की तबाही का सूत्र है