Pratidin Ek Kavita

जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो/ अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो
उसे नहीं जाना चाहिए

वापस
आख़िरी दरवाज़ा बंद होने से पहले

जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो
उसे नहीं फिरना चाहिए

बे-क़रार
एक ख़ूबसूरत राहदारी में

जब तक वो वीरान न हो जाए
जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो

उसे नहीं जुदा करना चाहिए
ख़ून-आलूद पाँव से

एक पूरा सफ़र
जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो

उसे नहीं मालूम करनी चाहिए
फूलों के एक दस्ते की क़ीमत

या दिन तारीख़ और वक़्त

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो - अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो
उसे नहीं जाना चाहिए

वापस
आख़िरी दरवाज़ा बंद होने से पहले

जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो
उसे नहीं फिरना चाहिए

बे-क़रार
एक ख़ूबसूरत राहदारी में

जब तक वो वीरान न हो जाए
जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो

उसे नहीं जुदा करना चाहिए
ख़ून-आलूद पाँव से

एक पूरा सफ़र
जिस का कोई इंतिज़ार न कर रहा हो

उसे नहीं मालूम करनी चाहिए
फूलों के एक दस्ते की क़ीमत

या दिन तारीख़ और वक़्त