Pratidin Ek Kavita

अंतिम सिपाही की तरह । लीलाधर मंडलोई

मैं उनके लिए पागल हूँ जिन्हें बचा नहीं सका
मैं उनके लिए रोता हूँ जो लड़ते हुए क़ब्र में अब भी ज़िंदा हैं

मैं रस्मी मातम में शरीक़ नहीं
मैं उन आवाज़ों में हूँ जिनमें मुक्ति का गान गूँजता है

मैं उनके लिए अपनी घृणाओं को आकाश करना चाहता हूँ
मैं न्याय के लिए अंतिम सिपाही की तरह

जीत के लिए मर जाना चाहता हूँ।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

अंतिम सिपाही की तरह । लीलाधर मंडलोई

मैं उनके लिए पागल हूँ जिन्हें बचा नहीं सका
मैं उनके लिए रोता हूँ जो लड़ते हुए क़ब्र में अब भी ज़िंदा हैं

मैं रस्मी मातम में शरीक़ नहीं
मैं उन आवाज़ों में हूँ जिनमें मुक्ति का गान गूँजता है

मैं उनके लिए अपनी घृणाओं को आकाश करना चाहता हूँ
मैं न्याय के लिए अंतिम सिपाही की तरह

जीत के लिए मर जाना चाहता हूँ।