Pratidin Ek Kavita

गुमशुदा गुलदस्ते | अदनान कफ़ील दरवेश 

कुछ पेड़ हैं वहाँ
पानी की तरह ठोस
और हवा की तरह नर्म
और आसमान-से हल्के-गुलाबी
फूल उनमें खिलते
काँटों-से बेशुमार
दहकते शोलों-से
दूर से चमकते...
कच्चे रास्ते
इशारों-से नाज़ुक
झुके चले आते मेरी तरफ़
जहाँ तुम्हारी यादों के
गुमशुदा गुलदस्ते
ढूँढ़ते हैं मेरे पाँव...
इन तुर्श अँधेरों में
अपनी खोई उम्र को सोचता
भटकता हूँ
जहाँ बर्फ़ से भी तेज़ 
गल जाती हैं यादें..

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

गुमशुदा गुलदस्ते | अदनान कफ़ील दरवेश

कुछ पेड़ हैं वहाँ
पानी की तरह ठोस
और हवा की तरह नर्म
और आसमान-से हल्के-गुलाबी
फूल उनमें खिलते
काँटों-से बेशुमार
दहकते शोलों-से
दूर से चमकते...
कच्चे रास्ते
इशारों-से नाज़ुक
झुके चले आते मेरी तरफ़
जहाँ तुम्हारी यादों के
गुमशुदा गुलदस्ते
ढूँढ़ते हैं मेरे पाँव...
इन तुर्श अँधेरों में
अपनी खोई उम्र को सोचता
भटकता हूँ
जहाँ बर्फ़ से भी तेज़
गल जाती हैं यादें..