Pratidin Ek Kavita

मैं फूल । गोपालदास "नीरज"

निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !
कल अधरों में
मुस्कान लिए आया था,
मन में अगणित
अरमान लिए आया था,

पर आज झर गया
खिलने से पहले ही,
साथी हैं बस
तन से लिपटे दो शूल !

निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

मैं फूल । गोपालदास "नीरज"

निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !
कल अधरों में
मुस्कान लिए आया था,
मन में अगणित
अरमान लिए आया था,

पर आज झर गया
खिलने से पहले ही,
साथी हैं बस
तन से लिपटे दो शूल !

निर्जन की नीरव डाली का मैं फूल !