Pratidin Ek Kavita

दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है | विनोद कुमार शुक्ल 

दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है 
कहकर मैं अपने घर से चला। 
यहाँ पहुँचते तक 
जगह-जगह मैंने यही कहा 
और यही कहता हूँ 
कि दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है। 
जहाँ पहुँचता हूँ 
वहाँ से चला जाता हूँ। 
दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है— 
बार-बार यही कह रहा हूँ 
और कितना समय बीत गया है 
लौटकर मैं घर नहीं 
घर-घर पहुँचना चाहता हूँ 
और चला जाता हूँ। 

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है | विनोद कुमार शुक्ल

दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है
कहकर मैं अपने घर से चला।
यहाँ पहुँचते तक
जगह-जगह मैंने यही कहा
और यही कहता हूँ
कि दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है।
जहाँ पहुँचता हूँ
वहाँ से चला जाता हूँ।
दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है—
बार-बार यही कह रहा हूँ
और कितना समय बीत गया है
लौटकर मैं घर नहीं
घर-घर पहुँचना चाहता हूँ
और चला जाता हूँ।