कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
अंतर्द्वंद | आलेन बास्केट
अनुवाद : धर्मवीर भारती
मेरा बायाँ हाथ मुझे प्राणदंड देता है
मेरा दायाँ हाथ मेरी रक्षा करता है
मेरी आँखें मुझे निर्वासन देती हैं
मेरी वाणी मुझे प्रताड़ित करती है :
अब समय आ गया है कि तुम
अपने साथ संधिपत्र पर हस्ताक्षर कर दो!
और इस पुराने हृदय में
हज़ारों लड़ाइयाँ लड़ी जा रही हैं
मेरे शत्रु और मेरे हताश मित्रों के बीच
जो अंत में समझौता कर लेंगे।
और ऐसी शांति का नया संसार बसाएँगे
जिसमें मेरे लिए कोई स्थान नहीं होगा!