Pratidin Ek Kavita

हार | प्रभात

जब-जब भी मैं हारता हूँ
मुझे स्त्रियों की याद आती है

और ताक़त मिलती है
वे सदा हारी हुई परिस्थिति में ही

काम करती हैं
उनमें एक धुन एक लय

एक मुक्ति मुझे नज़र आती है
वे काम के बदले नाम से

गहराई तक मुक्त दिखलाई पड़ती हैं
असल में वे निचुड़ने की हद तक

थक जाने के बाद भी
इसी कारण से हँस पाती हैं

कि वे हारी हुई हैं
विजय सरीखी तुच्छ लालसाओं पर उन्हें

ऐतिहासिक विजय हासिल है

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

हार | प्रभात

जब-जब भी मैं हारता हूँ
मुझे स्त्रियों की याद आती है

और ताक़त मिलती है
वे सदा हारी हुई परिस्थिति में ही

काम करती हैं
उनमें एक धुन एक लय

एक मुक्ति मुझे नज़र आती है
वे काम के बदले नाम से

गहराई तक मुक्त दिखलाई पड़ती हैं
असल में वे निचुड़ने की हद तक

थक जाने के बाद भी
इसी कारण से हँस पाती हैं

कि वे हारी हुई हैं
विजय सरीखी तुच्छ लालसाओं पर उन्हें

ऐतिहासिक विजय हासिल है