Pratidin Ek Kavita

इच्छा | शुभा

मैं चाहती हूँ कुछ अव्यवहारिक लोग

एक गोष्ठी करें
कि समस्याओं को कैसे बचाया जाए

उन्हें जन्म लेने दिया जाए
वे अपना पूरा क़द पाएँ

वे खड़ी हों
और दिखाई दें

उनकी एक भाषा हो
और कोई उन्हें सुने


What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

इच्छा | शुभा

मैं चाहती हूँ कुछ अव्यवहारिक लोग

एक गोष्ठी करें
कि समस्याओं को कैसे बचाया जाए

उन्हें जन्म लेने दिया जाए
वे अपना पूरा क़द पाएँ

वे खड़ी हों
और दिखाई दें

उनकी एक भाषा हो
और कोई उन्हें सुने