Pratidin Ek Kavita

उन्होंने घर बनाये  - अज्ञेय

 उन्होंने घर बनाये
और आगे बढ़ गये
जहाँ वे और घर बनाएँगे।

हम ने वे घर बसाये
और उन्हीं में जम गये :
वहीं नस्ल बढ़ाएँगे
और मर जाएँगे।

इस से आगे
कहानी किधर चलेगी?
खँडहरों पर क्या वे झंडे फहराएँगे
या कुदाल चलाएँगे,
या मिट्टी पर हमीं प्रेत बन मँडराएँगे
जब कि वे उस का गारा सान
साँचों में नयी ईंटें जमाएँगे?

एक बिन्दु तक
कहानी हम बनाते हैं।
जिस से आगे
कहानी हमें बनाती है :
उस बिन्दु की सही पहचान
क्या हमें आती है?

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

उन्होंने घर बनाये - अज्ञेय


उन्होंने घर बनाये
और आगे बढ़ गये
जहाँ वे और घर बनाएँगे।

हम ने वे घर बसाये
और उन्हीं में जम गये :
वहीं नस्ल बढ़ाएँगे
और मर जाएँगे।

इस से आगे
कहानी किधर चलेगी?
खँडहरों पर क्या वे झंडे फहराएँगे
या कुदाल चलाएँगे,
या मिट्टी पर हमीं प्रेत बन मँडराएँगे
जब कि वे उस का गारा सान
साँचों में नयी ईंटें जमाएँगे?

एक बिन्दु तक
कहानी हम बनाते हैं।
जिस से आगे
कहानी हमें बनाती है :
उस बिन्दु की सही पहचान
क्या हमें आती है?