Pratidin Ek Kavita

दृश्य और बिम्ब। राजेश जोशी 

एक सिनेमा घर के सामने छूटी हुई जगह में
एक नए मॉडल की चमचमाती कार
एक विकलांग बच्चे को डरा रही है
कार धीरे धीरे आगे सरक रही है
और डरता, घबराता, गिरता पड़ता
उल्टे पाँव दौड़ने की कोशिश कर रहा है
बच्चा
ड्राइवर मुस्कुरा रहा है
और आसपास खड़े तमाशबीन अंदर ही अंदर डर रहे हैं
तरस खा रहे हैं
पर हँस रहे हैं।
यह एक दृश्य है
जो हमारे समय के बिम्ब में बदल रहा है ।

What is Pratidin Ek Kavita?

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

दृश्य और बिम्ब। राजेश जोशी

एक सिनेमा घर के सामने छूटी हुई जगह में
एक नए मॉडल की चमचमाती कार
एक विकलांग बच्चे को डरा रही है
कार धीरे धीरे आगे सरक रही है
और डरता, घबराता, गिरता पड़ता
उल्टे पाँव दौड़ने की कोशिश कर रहा है
बच्चा
ड्राइवर मुस्कुरा रहा है
और आसपास खड़े तमाशबीन अंदर ही अंदर डर रहे हैं
तरस खा रहे हैं
पर हँस रहे हैं।
यह एक दृश्य है
जो हमारे समय के बिम्ब में बदल रहा है ।